सामने आइने के आ कर मैं

ख़ुद को करता हूँ ख़ुद उजागर मैं

प्रेम की जालियाँ बनाता हुआ
मकड़ियों से तेरे बदन पर मैं

जाने क्या कुछ जुनूँ में बोल गया
बातों बातों में उस के आ कर मैं

फ़रवरी माह की मोहब्बत तू
ख़त्म होता हुआ दिसंबर मैं

मुझ को छत से तू यूँ न देखा कर
वरना ले जाऊँगा उड़ाकर मैं

तुम हो बहता हुआ सफ़ीना और
नीचे ठहरा हुआ समुंदर मैं

सर से पा तक सुख़न की देवी तुम
सर से पा तक जुनूँ का पैकर मैं

दिल को छूती हुई सुख़न तुम हो
सब को भाता हुआ सुख़न-वर मैं

एक उम्मीद का इलाक़ा तू
और वहाँ का नया गवर्नर मैं

— Adnan Ali SHAGAF

More by Adnan Ali SHAGAF

Other ghazal from the same pen

See all from Adnan Ali SHAGAF →

Happy New Year Shayari Collection

Shers of happy new year shayari collection.

All Happy New Year Shayari Collection poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling