कभी कभार रहा दिल पे इख़्तियार नहीं
पर उस के बा'द किसी का भी इंतिज़ार नहीं
बताओ ऐसा कोई इश्क़ जिस
में हार नहीं
दिखाओ ऐसा कोई दिल जो तार-तार नहीं
वो एक दौर था कितनों पे ऐतिबार किया
ये एक दौर है कितनों का ऐतिबार नहीं
सो कह दो इन दवा-साज़ों से मुझ से दूर रहें
के इश्क़ शौक़ है मेरा कोई बुख़ार नहीं
सखी मैं कुछ नहीं तेरे जुनूँ का शैवा हूँ
मुझे तू अपने बदन से कभी उतार नहीं
इसी लिहाज़ से ये हिज्र और मुश्किल है
तेरे ख़िलाफ़ तो नफ़रत भी साज़गार नहीं
— Adnan Ali SHAGAF















