jaane kaisa badan men jaadu hai | जाने कैसा बदन में जादू है

  - Adnan Ali SHAGAF

जाने कैसा बदन में जादू है
देख ख़ुद पर न कोई क़ाबू है

हर घड़ी तुझको सोचते रहना
'इश्क़ में दिल तो एक साधू है

तेरे ग़म से भरे समंदर में
तेरी यादों का एक टापू है

जिसकी तुम हो गई हो उल्फ़त में
ठीक लड़का नहीं लड़ाकू है
'इश्क़ में किस तरह निभे उस सेे
मैं हूँ अहमक़ मगर वो चालू है

हिज्र के दिन के बाद वो लड़का
शे'र कहता है और निखट्टू है

बड़ा मुश्किल है फैसले का सफ़र
कँपकँपी हाथ में तराज़ू है

मुझ सेे मत पूछ क्या बला है शगफ़
ये कभी मैं हूँ तो कभी तू है

  - Adnan Ali SHAGAF

Nature Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Adnan Ali SHAGAF

As you were reading Shayari by Adnan Ali SHAGAF

Similar Writers

our suggestion based on Adnan Ali SHAGAF

Similar Moods

As you were reading Nature Shayari Shayari