जाने कैसा बदन में जादू है
देख ख़ुद पर न कोई क़ाबू है
हर घड़ी तुझको सोचते रहना
'इश्क़ में दिल तो एक साधू है
तेरे ग़म से भरे समंदर में
तेरी यादों का एक टापू है
जिसकी तुम हो गई हो उल्फ़त में
ठीक लड़का नहीं लड़ाकू है
'इश्क़ में किस तरह निभे उस सेे
मैं हूँ अहमक़ मगर वो चालू है
हिज्र के दिन के बाद वो लड़का
शे'र कहता है और निखट्टू है
बड़ा मुश्किल है फैसले का सफ़र
कँपकँपी हाथ में तराज़ू है
मुझ सेे मत पूछ क्या बला है शगफ़
ये कभी मैं हूँ तो कभी तू है
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