tujhko paane ka mujhe yuñ to koi shauq nahin | तुझको पाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

  - Adnan Ali SHAGAF

तुझको पाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
पास आने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

आप मैं दोस्त हैं इतना ही मुझे काफ़ी है
दिल लगाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

कि तेरे दर को फ़क़त दूर से तकता जाऊँ
घर में आने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

बैठ कुछ बात करें बात सुनें शाम ढले
नाच गाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

यूँँ करें मुझको मोहब्बत ही अता कर दें आप
ज़हर खाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

आपके तंज़ से कुछ सीख ही मिल जाती है
डाँट खाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

मैं कि उस्तादों के उस्तादों का उस्ताद 'शगफ़'
हाँ जताने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं

  - Adnan Ali SHAGAF

Jahar Shayari

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