तुझको पाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
पास आने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
आप मैं दोस्त हैं इतना ही मुझे काफ़ी है
दिल लगाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
कि तेरे दर को फ़क़त दूर से तकता जाऊँ
घर में आने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
बैठ कुछ बात करें बात सुनें शाम ढले
नाच गाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
यूँँ करें मुझको मोहब्बत ही अता कर दें आप
ज़हर खाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
आपके तंज़ से कुछ सीख ही मिल जाती है
डाँट खाने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
मैं कि उस्तादों के उस्तादों का उस्ताद 'शगफ़'
हाँ जताने का मुझे यूँँ तो कोई शौक़ नहीं
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