doob kar ubharne men der kitnii lagti hai | डूब कर उभरने में देर कितनी लगती है

  - Shahnaz Parveen Sahar

डूब कर उभरने में देर कितनी लगती है
रात के गुज़रने में देर कितनी लगती है

चुनरियों में चूड़ी में रंग कितने भाते हैं
रंग के उतरने में देर कितनी लगती है

माँ के पेट में बच्चा रोम रोम बढ़ता है
आदमी को मरने में देर कितनी लगती है

घर को घर बनाने में 'उम्र बीत जाती है
फिर मकान गिरने में देर कितनी लगती है

उँगलियों की पोरों में किर्चियाँ उतरती हैं
काँच के बिखरने में देर कितनी लगती है

'उम्र कैसे ढलती हे मौत कैसे पलती है
चार दिन गुज़रने में देर कितनी लगती है

शाख़ की हथेली पर फूल मुस्कुराता है
फूल के बिखरने में देर कितनी लगती है

दोस्ती के रिश्ते पर जब सवाल उठता है
दोस्त को मुकरने में देर कितनी लगती है

'उम्र भर के साथी जब रास्ते बदलते हैं
'उम्र को गुज़रने में देर कितनी लगती है

मस्लहत के पर्दे की 'उम्र कितनी होती है
ये नक़ाब उतरने में देर कितनी लगती है

एक सर की चादर हो और पाँव में चप्पल
अपने सज सँवरने में देर कितनी लगती है

  - Shahnaz Parveen Sahar

Qabr Shayari

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