इस तरह से न आज़मा मुझ को
मेहरबाँ है तो दे दुआ मुझ को
एक मुद्दत के बाद मिल पाया
एक अच्छा सा रास्ता मुझ को
तेरी नफ़रत के साँप ने इक दिन
आँख खुलते ही डस लिया मुझ को
सब की नज़रों में थी हवस क़ायम
कौन अंदर से देखता मुझ को
आज इक दम से बन गया शैतान
कल जो लगता था देवता मुझ को
साथ उस के सफ़र मैं करती हूँ
जो भी मिलता है बा-वफ़ा मुझ को
एक आज़ाद अंदलीब हूँ मैं
ज़िंदा देखे तो कर रिहा मुझ को
Read Full