mil na sakaa jo us ki hi chaahat kyun hai | मिल ना सका जो उस कि, ही चाहत क्युँ है

  - karan singh rajput

मिल ना सका जो उस कि, ही चाहत क्युँ है
ऐ-शख्श बता मुझको तिरी आदत क्युँ है

दिल ने नहीं सोचा, कभी कोइ गैर का
दिल को तुझी से इत'नी मोहब्बत क्युँ है

मुझको 'इश्क़, जब के है तिरी रूह से
तुझको फिर मेरे जिस्म कि हसरत क्युँ है

जिस हाथ में देखा, तिरे पत्थर दिखा
तुझको शिशों से इत'नी नफरत क्युँ है

जब तू मिरी औ'र मैं तिरा फिर ये क्या है
अपने बीच, ये लोग, ये इज्जत क्युँ है

हो ना सके जो एक हम तो क्या हुआ
इस
में बुरी के फिर मिरी किस्मत क्युँ है

जिसको तिरी ही तड़प नहीं है "करन"
उसके लिए तु'झे तड़पने कि जुर्रत क्युँ है

  - karan singh rajput

Aabroo Shayari

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