ख़ुद को अपने पास बिठा लेता हूँ
फिर अपना दुख आप सुना लेता हूँ
ताकि मुझे एहसास रहे जीने का
रोज़ाना इक बात चुभा लेता हूँ
सारे ख़्वाब अधूरे रह जाते हैं
ख़ुद को रस्सी से लटका लेता हूँ
उस को छूने से राहत मिलती है
आता- जाता हाथ मिला लेता हूँ
— Shivam Prajapati















