राह में तू इश्क़ की खोता है क्या अबबे-वफ़ा के धोखे से रोता है क्या अबज़िन्दगी में हर-सू ये इक शोर क्यूँ हैमरने की हालत में भी सोता है क्या अबसब्ज़ होती ही नहीं दिल की ज़मीं भीबीज ख़्वाहिश के तू ये बोता है क्या अब— Usman Saifi