हाथ मुझ से जब छुडाया था किसी ने
घर मिरे दिल का उजाड़ा था किसी ने
उम्र भर हूँ साथ तेरे ये बता कर
ज़िंदगी से यूँ निकाला था किसी ने
आँख से पानी गिरा बरसात जैसे
जिस्म को दिल से निकाला था किसी ने
वो लगा सीने मिरे मैं जी उठा था
छोड़ना कैसे सिखाया था किसी ने
याद तेरी इक सताती जो रहेगी
दर्द मेरा क्या उभारा था किसी ने
चल रहा था साथ मेरी ज़िंदगी में
रूह को जड़ से हटाया था किसी ने
— Vinod Ganeshpure















