कश्मकश यूँँ ज़िंदगी की चल रही है
और हर पल ज़िंदगी ही जल रही है
आज हम तुम है जुदा ये बात दिल को
साल हर दिन आग बन के खल रही है
कौन जाने क्या लिखा है ज़िंदगी में
साँस इक है जिस्म में जो चल रही है
— Vinod Ganeshpure
और हर पल ज़िंदगी ही जल रही है
आज हम तुम है जुदा ये बात दिल को
साल हर दिन आग बन के खल रही है
कौन जाने क्या लिखा है ज़िंदगी में
साँस इक है जिस्म में जो चल रही है
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