"इश्क़"
इक पल पल सा वक़्त
हर दिन गुज़रता हैं क्यूँ
न जाने दिल भी हरदम
दूरियों से डरता है क्यूँ
इश्क़ में हम डूबे हुए हैं
एक-दूसरे के इतने
चाह के दिल-ओ-जान से
दर्द ये मिलता है क्यूँ
शिकायत किस से ही करें
मना करने के बा'द भी
न जाने कैसे भला प्यार में
ये दिल पिघलता है क्यूँ
— Vinod Ganeshpure















