मिरे दिल में खटकती ही रही इक बात है कोईसभी ने जब ये पूछा उस की अब सौग़ात है कोईजिसे उठना सिखाया है जिसे चलना सिखाया थामुझी से आज कहता है तेरी औक़ात है कोई— Vishna prajapati