तुम को बतलाऊँ, मेरा क्या क्या ख़ारिज

प्यार हुआ तो मुझ को फूल मिला ख़ारिज

इस से और ज़ियादा क्या होगा खारिज
जीत रहा था इतने में, सट्टा ख़ारिज

दिल टूटा है, माना दुख होता होगा
लेकिन यार हुआ है कभी मतला ख़ारिज

चूड़ी चटकी और लगा कर के काजल
इक बेगम ने किया मेरा इक्का ख़ारिज

मीटर नइँ आता था, उस की आँखों पे
शे'र कहा था जब मैं ने, पहला ख़ारिज

ख़ारिज शे'र पे 'वाह' तुम्हारी भाभी की
पहली बार हुआ था कुछ अच्छा ख़ारिज

यार ग़ज़ल ख़ारिज है कुछ तो ख़ारिज हो
क्या कहते हो कर दूँ क्या मक़्ता खारिज

— Vijay Potter Singhadiya

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