भले दिल तंग हो लेकिन सिवा करना ही पड़ता है
ये ऐसा फ़र्ज़ है जिस को अदा करना ही पड़ता है
मुक़द्दर में है फिर जो भी लिखा करना ही पड़ता है
हमें लख़्त-ए-जिगर इक दिन जुदा करना ही पड़ता है
यही दस्तूर है दुनिया का, है माँ बाप पर लाज़िम
जवाँ हो जाए गर बेटी विदा करना ही पड़ता है
— Wajid Husain Sahil















