उस की हम पर ये मेहरबानी देख
जिस्म में ख़ून है न पानी देख
ग़म ने पीछा न आज तक छोड़ा
है यही मुझ
में जावेदानी देख
ख़्वाब मेरा है आई पी एस का
तू भी इक ख़्वाब आसमानी देख
एक तितली ने गुल को सोख लिया
हाए भँवरे की पासबानी देख
इस से पहले मैं अर्ज़-ए-हाल करूँ
देख मेरी ये ना-तवानी देख
मर गए कितने आ के चक्कर में
हम-ज़बानों की हम-ज़बानी देख
कौन तश्बीह जा के दे उस को
जब नहीं कोई उस का सानी देख
कैसे लाऊँ मैं जीने का जज़्बा
साथ देती न ज़िंदगानी देख
— Manish Kumar Gupta















