आसेब-ज़दा शय है ये वहशत उसे कहना
छोड़ेगी नहीं उसको ये हाफ़त उसे कहना
कहना कि बहुत याद किया करता है कोई
कहना कि नहीं मिलती है राहत उसे कहना
दौलत से फ़क़त जिस्म जुटा सकते हो लेकिन
दौलत से नहीं मिलती मुहब्बत उसे कहना
कहने को तेरे नाज़ उठा लेते हैं लेकिन
हम इतने नहीं सादा तबीयत उसे कहना
वो भूल रहा है कि ये दुनिया है मेरी जाँ
काम आती नहीं याँ पे शराफ़त उसे कहना
हाँ उसके बिन अब ठीक है फ़िलहाल तो सब कुछ
सिगरेट की नहीं जाती बस इक लत उसे कहना
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