Altaf Mashhadi

Altaf Mashhadi

@altaf-mashhadi

Altaf Mashhadi shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Altaf Mashhadi's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
लेटा हुआ हूँ साया-ए-ग़ुर्बत में घर से दूर
दिल से क़रीं हैं अहल-ए-वतन और नज़र से दूर

जब तक है दिल रहीन-ए-मआल-ओ-असीर-ए-अक़्ल
रहना है तुझ से और तिरी रहगुज़र से दूर

ऐ कैफ़ उन की मस्त निगाहों में छुप के आ
ऐ दर्द-ए-दम ज़दन में हो मेरे जिगर से दूर

इक दिन उलटने वाली है ज़ाहिद बिसात-ए-ज़ोहद
कब तक रहेगा दिल निगह-ए-फ़ित्ना-गर से दूर

वो कोई ज़िंदगी है जवानी है वो कोई
ऐ दोस्त जो है तेरे जमाल-ए-नज़र से दूर

क्या आई तेरे जी में कि तक़दीर यूँ मुझे
फेंका है ला के वादी-ए-ग़ुर्बत में घर से दूर

ऐ हुस्न-ए-बे-पनाह बताए कोई मुझे
दुनिया की कौन चीज़ है तेरे असर से दूर

अल्लाह रे नसीब कि पाई है वो फ़ुग़ाँ
जो उम्र भर रही है फ़रेब-ए-असर से दूर

'अलताफ़' नाज़ अपनी गदाई पे है मुझे
दामन है उस का साया-ए-लाल-ओ-गुहर से दूर
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Altaf Mashhadi
ख़िज़ाँ से मानूस हो चुके हैं नहीं ख़बर कुछ बहार क्या है
तड़प की लज़्ज़त है जिन को हासिल नज़र में उन की क़रार क्या है

बचेगा कब तक ग़रीब इंसाँ हवादिस-ए-गर्दिश-ए-ज़माँ से
हवा के झोंकों में जल सकेगा चराग़ ये ए'तिबार क्या है

क़रीब हो कर भी दूर हैं जैसे एक दरिया के दो किनारे
यूँही गुलिस्ताँ में रह के भी हम नहीं हैं वाक़िफ़ बहार क्या है

चमन के हो कर जो जी रहे हैं ख़िज़ाँ है रश्क-ए-बहार उन की
परस्तिश-ए-गुल्सिताँ ही ठहरी तो फ़र्क़-ए-ग़ुंचा-ओ-ख़ार क्या है

नशात-ए-वस्ल-ओ-शराब-ए-दीदार पर जो कम-ज़र्फ़ मुतमइन हैं
उन्हें कोई किस तरह बताए तअ'य्युश-ए-इंतिज़ार क्या है

ख़ुदा-रा 'अलताफ़' मुझ से अहबाब मेरी तन्हाइयाँ न छीनें
ग़मों के होते हुए किसी को ज़रूरत-ए-ग़म-गुसार क्या है
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