Arvind Asar

Arvind Asar

@arvindas754091

Arvind Asar shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Arvind Asar's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

कोशिश सब करते हैं उस को पाने की सौ में लेकिन एक निशाना लगता है — Arvind Asar
वो आग, हवा, संत की बानी की तरह है काटोगे उसे कैसे जो पानी की तरह है — Arvind Asar

Ghazal

इश्क़ में गुज़रे ज़माने पे हँसी आती है रात दिन अश्क बहाने पे हँसी आती है जिन को रो रो के सुनाते थे कभी अपनों को अब वही क़िस्से सुनाने पे हँसी आती है आज जागीर की क़ीमत जो समझ आई तो सारी जागीर लुटाने पे हँसी आती है तेरी तस्वीर जो सीने से लगी रहती थी आज सीने से लगाने पे हँसी आती है जिस की सूरत के सिवा याद नहीं था कुछ भी उस की अब याद दिलाने पे हँसी आती है रोज़ खाते थे क़सम हम न जुदा होंगे कभी आज उन क़समों के खाने पे हँसी आती है जिस की बस एक छुअन से ही सिहर जाता था उस को अब हाथ लगाने पे हँसी आती है हर घड़ी याद किया करता था मैं दिल से जिसे अब उसे दिल से भुलाने पे हँसी आती है ख़्वाब तो ख़्वाब है पूरे नहीं होते हैं "असर" ख़्वाब आँखों में बसाने पे हँसी आती है — Arvind Asar
मरने का ख़ौफ़ और घुटन ओढ़ता हूँ मैं सोता हूँ रात में तो कफ़न ओढ़ता हूँ मैं चाहो तो जिस्म काट के तुम देख लो मेरा अपने बदन पे अपना बदन ओढ़ता हूँ मैं कंबल, रज़ाई कुछ भी नहीं चाहिए मुझे रातों में सिर्फ़ दिन की थकन ओढ़ता हूँ मैं हर सू धधक रहीं हैं गुनाहों की भट्टियाँ पूरे बदन पे जैसे जलन ओढ़ता हूँ मैं मुझ सेे बड़ा किसी का भी कमरा नहीं यहाँ सोता ज़मीन पर हूँ गगन ओढ़ता हूँ मैं ख़ुशियों का साथ रास न आया कभी मुझे फूलों की सेज पर भी चुभन ओढ़ता हूँ मैं मैं एकता की सीप में महफ़ूज़ हूँ "असर" सब मौसमों में गंगो-जमन ओढ़ता हूँ मैं — Arvind Asar
उल्फ़त की एक एक निशानी का क्या करें किरदार जब नहीं हैं कहानी का क्या करें अच्छी तरह से याद है तरसे हैं बूँद बूँद बेवक़्त अब जो बरसा है, पानी का क्या करें इस मुफ़्लिसी के दौर में उठता है ये सवाल बचपन तो जा चुका है जवानी का क्या करें जब से पसंद आई है उन को नई ग़ज़ल तब से सवाल है कि पुरानी का क्या करें कोई भी शख़्स सुनने को तैयार ही नहीं नानक, कबीर, बुद्ध की बानी का क्या करें ये रह के दिल को याद दिलाती है आप की इस चाँदनी में रात की रानी का क्या करें हिलती नहीं जो सूखे हुए पेड़ की तरह ठहरी हुई बदन की रवानी का क्या करें — Arvind Asar