पीला गुलाब हो कि वो नीला गुलाब हो

लेकिन कोई तो हो जो तुम्हारा जवाब हो

आओ कि फिर से लौट चलें कालिजों में हम
मिलने का तुम से फिर से बहाना किताब हो

तुम से नशीली चीज़ कोई दूसरी नहीं
दौलत हो या रसूख़ हो या वो शराब हो

मुझ को तुम्हीं बताओ कि क्या हो मेरे लिए
तुम रंग हो महक हो धनक हो कि ख़्वाब हो

क़िस्से, कहानी और किताबों को क्यूँ पढ़ूँ
जब मेरे हर सवाल का बस तुम जवाब हो

नाकामयाब इश्क़ का भी अपना है मज़ा
अच्छा नहीं है इश्क़ सदा कामयाब हो

खेला है तुम ने आँख मिचौली का खेल जब
ऐसे में क्यूँ 'असर' की न निय्यत ख़राब हो

— Arvind Asar

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