सुनहरी और रुपहली मछलियां हैं
समुन्दर की बहुत सी बच्चियां हैं
अजब मल्लाहों ने चप्पू संभाले
कि अब गुमराह सारी कश्तियाँ हैं
तुम्हारे पास है धनवान कोई
हमारे पास केवल चिट्ठियाँ हैं
जिन्हें सब शे'र कहते हैं, वो शायद
किसी शाइ'र के दिल की सिसकियां हैं
हमीं तकते हैं वहशत की नज़र से
हमीं कहते हैं जिन को देवियां हैं
— Arvind Asar















