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Top 10 of
Iftikhar Arif
NAZM
जबीन-ए-वक़्त पर लिक्खी हुई सच्चाइयाँ रौशन रही हैं
— Iftikhar Arif
10
NAZM
मिरी ज़िंदगी में बस इक किताब है इक चराग़ है
— Iftikhar Arif
9
GHAZAL
बस्ती भी समुंदर भी बयाबाँ भी मिरा है
आँखें भी मिरी ख़्वाब-ए-परेशाँ भी मिरा है
Iftikhar Arif
8
GHAZAL
बिखर जाएँगे हम क्या जब तमाशा ख़त्म होगा
मेरे मा'बूद आख़िर कब तमाशा ख़त्म होगा
Iftikhar Arif
7
GHAZAL
दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो
कोई तो हो जो मिरी वहशतों का साथी हो
Iftikhar Arif
6
GHAZAL
अज़ाब ये भी किसी और पर नहीं आया
कि एक उम्र चले और घर नहीं आया
Iftikhar Arif
5
GHAZAL
मेरे ख़ुदा मुझे इतना तो मो'तबर कर दे
मैं जिस मकान में रहता हूँ उस को घर कर दे
Iftikhar Arif
4
GHAZAL
ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है
ऐसी तन्हाई कि मर जाने को जी चाहता है
Iftikhar Arif
3
SHER
ख़ुद को बिखरते देखते हैं कुछ कर नहीं पाते हैं
फिर भी लोग ख़ुदाओं जैसी बातें करते हैं
Iftikhar Arif
2
SHER
बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं
Iftikhar Arif
1
Khalil Ur Rehman Qamar
Muneer Niyazi
Anand Raj Singh
Ahmad Husain Mail
Kaif Ahmad Siddiqui
Anwar Taban
Dilawar Ali Aazar
Ameeq Hanafi
Azhar Iqbal
Azm Shakri