Nawaz Deobandi

Top 10 of Nawaz Deobandi

    मंज़िल पे न पहुँचे उसे रस्ता नहीं कहते
    दो चार क़दम चलने को चलना नहीं कहते

    इक हम हैं कि ग़ैरों को भी कह देते हैं अपना
    इक तुम हो कि अपनों को भी अपना नहीं कहते

    कम-हिम्मती ख़तरा है समुंदर के सफ़र में
    तूफ़ान को हम दोस्तो ख़तरा नहीं कहते

    बन जाए अगर बात तो सब कहते हैं क्या क्या
    और बात बिगड़ जाए तो क्या क्या नहीं कहते
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    धूप को साया ज़मीं को आसमाँ करती है माँ
    हाथ रख कर मेरे सर पर सायबाँ करती है माँ

    मेरी ख़्वाहिश और मेरी ज़िद उस के क़दमों पर निसार
    हाँ की गुंज़ाइश न हो तो फिर भी हाँ करती है माँ
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    Nawaz Deobandi
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    सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुरअत और बढ़ती है
    कोई जब रास्ता रोके तो हिम्मत और बढ़ती है
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    तुम इस ख़मोश तबीअत पे तंज़ मत करना
    वो सोचता है बहुत और बोलता कम है
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    सच बोलने के तौर-तरीक़े नहीं रहे
    पत्थर बहुत हैं शहर में शीशे नहीं रहे
    Nawaz Deobandi
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    अंजाम उस के हाथ है आग़ाज़ कर के देख
    भीगे हुए परों से ही परवाज़ कर के देख
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    ख़ुद को कितना छोटा करना पड़ता है
    बेटे से समझौता करना पड़ता है

    जब औलादें नालायक़ हो जाती हैं
    अपने ऊपर ग़ुस्सा करना पड़ता है

    सच्चाई को अपनाना आसान नहीं
    दुनिया भर से झगड़ा करना पड़ता है

    जब सारे के सारे ही बे-पर्दा हों
    ऐसे में खु़द पर्दा करना पड़ता है

    प्यासों की बस्ती में शो'ले भड़का कर
    फिर पानी को महंगा करना पड़ता है

    हँस कर अपने चहरे की हर सिलवट पर
    शीशे को शर्मिंदा करना पड़ता है
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    हाल-ए-दिल सब से छुपाने में मज़ा आता है
    आप पूछें तो बताने में मज़ा आता है
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    उस के क़त्ल पे मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया
    मेरे क़त्ल पे आप भी चुप हैं अगला नंबर आप का है
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