Ajay Sahaab

Top 10 of Ajay Sahaab

    लगा के धड़कन में आग मेरी ब-रंग-ए-रक़्स-ए-शरर गया वो
    मुझे बना के सुलगता सहरा मिरे जहाँ से गुज़र गया वो

    यूँ नींद से क्यूँ मुझे जगा कर चराग़-ए-उम्मीद फिर जला कर
    हुई सहर तो उसे बुझा कर हवा के जैसा गुज़र गया वो

    वो रेत पर इक निशान जैसा था मोम के इक मकान जैसा
    बड़ा सँभल कर छुआ था मैं ने प एक पल में बिखर गया वो

    वो साथ मेरे था जैसे हर पल वो देखता था मुझे मुसलसल
    ज़रा सा मौसम बदल गया तो चुरा के मुझ से नज़र गया वो

    वो एक बिछड़े से मीत जैसा वो इक भुलाए से गीत जैसा
    कोई पुरानी सी धुन जगा कर वजूद-ओ-दिल में उतर गया वो

    वो दोस्त सारे थे चार पल के जो चल दिए हम-सफ़र बदल के
    'सहाब'-ए-नादाँ वहीं खड़ा है उसी डगर पर ठहर गया वो
    Read Full
    Ajay Sahaab
    10
    0 Likes
    रात जब टूट कर बिखर जाए
    जागने वाला फिर किधर जाए

    उम्र गुज़री है जैसे कानों से
    सरसराती हवा गुज़र जाए

    अपनी यादें भी साथ ले जा तू
    ये तिरा क़र्ज़ भी उतर जाए

    तेज़ चलने में गिर न जाए कहीं
    वक़्त से बोल दो ठहर जाए

    अब तो तू भी नहीं है धड़कन में
    दिल का क्या काम अब वो मर जाए
    Read Full
    Ajay Sahaab
    9
    0 Likes
    वो माहताब भी ख़ुशबू से भर गया होगा
    जो चाँदनी ने तिरी ज़ुल्फ़ को छुआ होगा

    तिरे लबों से जो निकला था इक तबस्सुम सा
    मिरे लिए तो वही गीत बन गया होगा

    लिखा है आज तिरा नाम मैं ने काग़ज़ पर
    ये मेरा लफ़्ज़ भी इतरा के चल रहा होगा

    मिरी पलक पे है एहसास जैसे मख़मल सा
    तुम्हारा ख़्वाब उसे छू के चल दिया होगा

    मुझे यक़ीन है तेरे ही सुर्ख़ गालों ने
    धनक को शोख़ सा ये रंग दे दिया होगा

    जो देखता है तिरा हुस्न रोज़ छुप छुप कर
    उस आइने को भी तो इश्क़ हो गया होगा
    Read Full
    Ajay Sahaab
    8
    0 Likes
    मेरे ज़ख़्मों मिरी रुस्वाई को वापस ले ले
    इस सुलगती हुई तन्हाई को वापस ले ले

    इल्म आए न अगर काम किसी मुफ़्लिस के
    आ के मुझ से मिरी दानाई को वापस ले ले

    या तो सच कहने पे सुक़रात को मारे न कोई
    या तो संसार से सच्चाई को वापस ले ले

    चीख़ उट्ठे हैं मिरे घर के ये ख़ाली बर्तन
    अब तो बाज़ार से महँगाई को वापस ले ले

    या तो हर सम्त ये दहशत के नज़ारे न दिखा
    या मिरी आँखों से बीनाई को वापस ले ले

    या तो इंसान के हर ज़ख़्म को भर दे मौला
    या तो दुनिया से मसीहाई को वापस ले ले

    शाहिद-ए-जुर्म हो फिर भी न लहू खौल उठे
    ऐसे ख़ामोश तमाशाई को वापस ले ले

    बज़्म-ए-बातिल में भी हिम्मत रहे हक़-गोई की
    या मिरी ताक़त-ए-गोयाई को वापस ले ले
    Read Full
    Ajay Sahaab
    7
    0 Likes
    सब है फ़ानी यहाँ संसार में किस का क्या है
    फ़िक्र फिर भी है तुझे अपना पराया क्या है

    आप का पहला ही अंदाज़ बता देता है
    आप को आप के वालिद ने सिखाया क्या है

    ज़िंदगी ख़ुद पे तू इतना भी गुमाँ मत करना
    चंद साँसों के सिवा तेरा असासा क्या है

    फिर से इक और लड़ाई के बहाने के सिवा
    तुम बता दो कि किसी जंग से मिलता क्या है

    उम्र भर कुछ न किया जिस की तमन्ना के सिवा
    उस ने पूछा भी नहीं मेरी तमन्ना क्या है

    कुछ ग़रीबों की गली में भी दिए जल जाएँ
    इस से बेहतर भी दिवाली का उजाला क्या है

    कोई जज़्बा कोई एहसास न धड़कन है कोई
    ये अगर दिल है मिरे दोस्त तो सहरा क्या है

    दाम मन-माने उसे दे के ख़रीदा तू ने
    देख तो ले तुझे बाज़ार ने बेचा क्या है

    वही भूके वही आहें वही आँसू हैं 'सहाब'
    शहर का नाम बदल जाने से बदला क्या है
    Read Full
    Ajay Sahaab
    6
    0 Likes
    भूल पाए न तुझे आज भी रोने वाले
    तू कहाँ है मिरी आँखों को भिगोने वाले

    हम किसी ग़ैर के हो जाएँ ये मुमकिन ही नहीं
    और तुम तो कभी अपने नहीं होने वाले

    सोचते हैं कि कहाँ जा के तलाशें उन को
    हम को कुछ दोस्त मिले थे कभी खोने वाले

    रेत के जैसा है अब तो ये मुक़द्दर मेरा
    ख़ुद बिखर जाएँगे अब मुझ को पिरोने वाले

    दर्द और अश्क ज़माने में अज़ल से हैं वही
    सिर्फ़ बदले हैं हर इक दौर में रोने वाले

    पेड़ को अपना ही साया नहीं मिलता लोगों
    फ़स्ल अपनी कभी पाते नहीं बोने वाले

    दर्द ग़ैरों का भला कौन उठाता है 'सहाब'
    सब यहाँ ख़ुद की सलीबों को हैं ढोने वाले
    Read Full
    Ajay Sahaab
    5
    0 Likes
    हम भी गुज़र गए यहाँ कुछ पल गुज़ार के
    रातें थीं क़र्ज़ की यहाँ दिन थे उधार के

    जैसे पुराना हार था रिश्ता तेरा मेरा
    अच्छा किया जो रख दिया तू ने उतार के

    दिल में हज़ार दर्द हों आँसू छुपा के रख
    कोई तो कारोबार हो बिन इश्तिहार के

    क्या जाने अब भी दर्द को क्यूँ है मेरी तलाश
    टुकड़े भी अब कहाँ बचे इस के शिकार के

    शायद ज़बाँ पे क़र्ज़ था हम ने चुका दिया
    ख़ामोश हो गए हैं तुझे हम पुकार के

    ऐसे सुलग उठा तेरी यादों से दिल मेरा
    जैसे धधक उठें कहीं जंगल चिनार के
    Read Full
    Ajay Sahaab
    4
    0 Likes
    तन्हाइयों में अश्क बहाने से क्या मिला
    ख़ुद को दिया बना के जलाने से क्या मिला

    मुझ से बिछड़ के रेत सा वो भी बिखर गया
    उस जाने वाले शख़्स को जाने से क्या मिला

    अब भी मिरे वजूद में हर साँस में वही
    मैं सोचता हूँ उस को भुलाने से क्या मिला

    तू क्या गया कि दिल मिरा ख़ामोश हो गया
    इन धड़कनों के शोर मचाने से क्या मिला

    अपने ही एक दर्द का चारा न कर सके
    सारे जहाँ का दर्द उठाने से क्या मिला

    जिस के लिए लिखा उसे वो तो न सुन सका
    वो गीत महफ़िलों को सुनाने से क्या मिला

    उन का हर एक हर्फ़ है दिल पर लिखा हुआ
    उस दोस्त के ख़तों को जलाने से क्या मिला

    सोचो ज़रा कि तुम ने ज़माने को क्या दिया
    क्यूँ सोचते हो तुम को ज़माने से क्या मिला
    Read Full
    Ajay Sahaab
    3
    0 Likes
    यूँ ही हर बात पे हँसने का बहाना आए
    फिर वो मा'सूम सा बचपन का ज़माना आए

    काश लौटें मिरे पापा भी खिलौने ले कर
    काश फिर से मिरे हाथों में ख़ज़ाना आए

    काश दुनिया की भी फ़ितरत हो मिरी माँ जैसी
    जब मैं बिन बात के रूठूँ तो मनाना आए

    हम को क़ुदरत ही सिखा देती है कितनी बातें
    काश उस्तादों को क़ुदरत सा पढ़ाना आए

    आह सहसा कभी स्कूल से छुट्टी जो मिले
    चीख़ कर बच्चों का वो शोर मचाना आए

    आज बचपन कहीं बस्तों में ही उलझा है 'सहाब'
    फिर वो तितली को पकड़ना वो उड़ाना आए
    Read Full
    Ajay Sahaab
    2
    0 Likes
    जब भी मिलते हैं तो जीने की दुआ देते हैं
    जाने किस बात की वो हम को सज़ा देते हैं

    हादसे जान तो लेते हैं मगर सच ये है
    हादसे ही हमें जीना भी सिखा देते हैं

    रात आई तो तड़पते हैं चराग़ों के लिए
    सुब्ह होते ही जिन्हें लोग बुझा देते हैं

    होश में हो के भी साक़ी का भरम रखने को
    लड़खड़ाने की हम अफ़्वाह उड़ा देते हैं

    क्यूँ न लौटे वो उदासी का मुसाफ़िर यारो
    ज़ख़्म सीने के उसे रोज़ सदा देते हैं
    Read Full
    Ajay Sahaab
    1
    0 Likes