Charagh Sharma

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    वो हँस के देखती होती तो उससे बात करते
    कोई उम्मीद भी होती तो उससे बात करते

    हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ
    वो लड़की अजनबी होती तो उससे बात करते

    हमारे जाम आधी हौसला-अफ़ज़ाई कर पाए
    अगर उसने भी पी होती तो उससे बात करते

    हम उसके झुमकों की लरज़िश पे अक्सर सोचते हैं
    हवा से दोस्ती होती तो उससे बात करते

    ये ख़ामोशी भी क्या है गुफ़्तगू की इंतेहा है
    कोई बात अनकही होती तो उससे बात करते

    तवज्जो से बहुत शर्माती है आवाज़ अपनी
    अगर वो सो रही होती तो उससे बात करते

    किसी से बात करना इतना मुश्किल भी नहीं था
    किसी ने बात की होती तो उससे बात करते
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    इतने अफ़सुर्दा नहीं हैं हम कि कर लें ख़ुदकुशी
    और न इतने ख़ुश कि सच में मरने की ख़्वाहिश न हो
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    तुम्हारा क्या है तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है
    हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है

    गुलाब भी हैं गुलाबों में ख़ार भी हैं बता
    निशानी देनी है या फिर निशान देना है

    तेरा सवाल मेरी जान का सवाल है और
    जवाब देने से आसान जान देना है

    उन्होंने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है
    हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है

    ये बेज़ुबानों की महफ़िल है दोस्त याद रहे
    यहाँ ख़मोशी का मतलब ज़ुबान देना है
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    "उसके हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए
    उसका हाथ है फूल को फूल बनाने में
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    ख़ुदा, फ़रिश्ते, पयम्बर, बशर किसी का नहीं
    मुझे लिहाज़ तो सबका है डर किसी का नहीं
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    तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है
    मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है
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    तितली से दोस्ती न गुलाबों का शौक़ है
    मेरी तरह उसे भी किताबों का शौक़ है

    वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त
    आँखों को सिर्फ़ आप के ख़्वाबों का शौक़ है

    हम आशिक़-ए-ग़ज़ल हैं तो मग़रूर क्यों न हों
    आख़िर ये शौक़ भी तो नवाबों का शौक़ है

    उस शख़्स के फ़रेब से वाक़िफ़ हैं हम मगर
    कुछ अपनी प्यास को ही सराबों का शौक़ है

    गिरने दो ख़ुद सँभलने दो ऐसे ही चलने दो
    ये तो 'चराग़' ख़ाना-ख़राबों का शौक़ है
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    उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं
    उड़ने वाले उड़ते उड़ते उड़ते हैं

    कोई उस बूढे पीपल से कह आओ
    पिंजरे में हम ख़ूब मज़े से उड़ते हैं

    हाए वो चिड़िया उड़ मैना उड़ के झगड़े
    और फिर साबित करना बकरे उड़ते हैं

    पिंजरे में दाना पानी सब रक्खा है
    और परिंदे भूके प्यासे उड़ते हैं

    देख रहे हैं हम भी जवानी के मौसम
    बंद हवा में कैसे दुपट्टे उड़ते हैं

    इस तोते का पिंजरा खोलो फिर देखो
    कैसे इस तोते के तोते उड़ते हैं
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    याद भूले हुए लोगों को किया जाता है
    भूल जाओ कि तुम्हे याद किया जायेगा
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    तुम्हें ये ग़म है कि अब चिट्ठियाँ नहीं आती
    हमारी सोचो हमें हिचकियाँ नहीं आती
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