वो हँस के देखती होती तो उस से बात करते
कोई उम्मीद भी होती तो उस से बात करते
कोई उम्मीद भी होती तो उस से बात करते
हम स्टेशन से बाहर आए इस अफ़सोस के साथ
वो लड़की अजनबी होती तो उस से बात करते
हमारे जाम आधी हौसला-अफ़ज़ाई कर पाए
अगर उस ने भी पी होती तो उस से बात करते
हम उस के झुमकों की लरज़िश पे अक्सर सोचते हैं
हवा से दोस्ती होती तो उस से बात करते
ये ख़ामोशी भी क्या है गुफ़्तगू की इंतेहा है
कोई बात अनकही होती तो उस से बात करते
तवज्जोह से बहुत शर्माती है आवाज़ अपनी
अगर वो सो रही होती तो उस से बात करते
किसी से बात करना इतना मुश्किल भी नहीं था
किसी ने बात की होती तो उस से बात करते
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तुम्हारा क्या है तुम्हें सिर्फ़ ज्ञान देना है
हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है
हमारी सोचो हमें इम्तिहान देना है
गुलाब भी हैं गुलाबों में ख़ार भी हैं बता
निशानी देनी है या फिर निशान देना है
तेरा सवाल मेरी जान का सवाल है और
जवाब देने से आसान जान देना है
उन्होंने अपने मुताबिक़ सज़ा सुना दी है
हमें सज़ा के मुताबिक़ बयान देना है
ये बेज़ुबानों की महफ़िल है दोस्त याद रहे
यहाँ ख़मोशी का मतलब ज़बान देना है
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वर्ना तो नींद से भी नहीं कोई ख़ास रब्त
आँखों को सिर्फ़ आप के ख़्वाबों का शौक़ है
हम आशिक़-ए-ग़ज़ल हैं तो मग़रूर क्यूँ न हों
आख़िर ये शौक़ भी तो नवाबों का शौक़ है
उस शख़्स के फ़रेब से वाक़िफ़ हैं हम मगर
कुछ अपनी प्यास को ही सराबों का शौक़ है
गिरने दो ख़ुद सँभलने दो ऐसे ही चलने दो
ये तो 'चराग़' ख़ाना-ख़राबों का शौक़ है
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