udte hain girte hain phir se udte hain | उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं

  - Charagh Sharma

उड़ते हैं गिरते हैं फिर से उड़ते हैं
उड़ने वाले उड़ते उड़ते उड़ते हैं

कोई उस बूढे पीपल से कह आओ
पिंजरे में हम ख़ूब मज़े से उड़ते हैं

हाए वो चिड़िया उड़ मैना उड़ के झगड़े
और फिर साबित करना बकरे उड़ते हैं

पिंजरे में दाना पानी सब रक्खा है
और परिंदे भूके प्यासे उड़ते हैं

देख रहे हैं हम भी जवानी के मौसम
बंद हवा में कैसे दुपट्टे उड़ते हैं

इस तोते का पिंजरा खोलो फिर देखो
कैसे इस तोते के तोते उड़ते हैं

  - Charagh Sharma

Mausam Shayari

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