Qaisar Shameem

Qaisar Shameem

@qaisar-shameem

Qaisar Shameem shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Qaisar Shameem's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Ghazal
वो जो सब का बहुत चहीता था
क़ब्र की साअ'तों में तन्हा था

जिस ने दुनिया को ख़ूब देखा था
उस की आँखों में क़हक़हा सा था

रंज क्या ख़्वाब के बिखरने का
कुछ न था रेत का घरौंदा था

उस के आँगन में रौशनी थी मगर
घर के अंदर बड़ा अंधेरा था

वो भी पथरा के रह गया आख़िर
उस की आँखों में जो सवेरा था

एक पिंजरा उदास तन्हाई
उस ने क्या क्या ख़ुदा से माँगा था

शाख़ झुलसी हुई थी और उस पर
एक सहमा हुआ परिंदा था

क़हक़हों की बरात निकली थी
दर्द की चीख़ कौन सुनता था

पुल न था और सामने उस के
एक तूफ़ाँ-ब-दोश दरिया था

एक ख़ुशबू का बाँटने वाला
गंदी बस्ती का रहने वाला था

दुख में आख़िर ये खुल गया 'क़ैसर'
नाम इक मस्लहत का रिश्ता था
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Qaisar Shameem
मौसम तो बदलते हैं लेकिन क्या गर्म हवा क्या सर्द हवा
ऐ दोस्त हमारे आँगन में रहती है हमेशा ज़र्द हवा

सब अपने शनासा छोड़ गए रस्ते में हमें ग़ैरों की तरह
चेहरे पे हमारे डाल गई ला कर ये कहाँ की गर्द हवा

छूटे न कभी फूलों का नगर कोशिश तो यही है अपनी मगर
इक रोज़ उड़ा ले जाएगी पत्तों की तरह बे-दर्द हवा

क्या बात हुई क्यूँ शहर जला अब इस के सिवा कुछ याद नहीं
इक फ़र्द सरापा आग हुआ पल-भर में हुआ इक फ़र्द हवा

आई है घने जंगल में अभी जो खेल भी चाहे खेले मगर
कल मेरे साथ उड़ाएगी फिर सहरा सहरा गर्द हवा

आँखों की चमक मौहूम हुई लौ देते बदन अफ़्सुर्दा हुए
दर आई है 'क़ैसर' घर में मिरे ये कैसी रुतों की सर्द हवा
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