मुयस्सर आ चुकी है सर-बुलंदी मुड़ के क्यूँ देखें
इमामत मिल गई हम को तो उम्मत छोड़ दी हम ने
किसे मा'लूम क्या होगा मआल आइंदा नस्लों का
जवाँ हो कर बुज़ुर्गों की रिवायत छोड़ दी हम ने
ये मुल्क अपना है और इस मुल्क की सरकार अपनी है
मिली है नौकरी जब से बग़ावत छोड़ दी हम ने
है उतना वाक़ि'आ उस से न मिलने की क़सम खा ली
तअस्सुफ़ इस क़दर गोया वज़ारत छोड़ दी हम ने
करें क्या ये बला अपने लिए ख़ुद मुंतख़ब की है
गिला बाक़ी रहा लेकिन शिकायत छोड़ दी हम ने
सितारे इस क़दर देखे कि आँखें बुझ गईं अपनी
मोहब्बत इस क़दर कर ली मोहब्बत छोड़ दी हम ने
जो सोचा है 'अज़ीज़ों की समझ में आ नहीं सकता
शरारत अब के ये की है शरारत छोड़ दी हम ने
उलझ पड़ते अगर तो हम में तुम में फ़र्क़ क्या रहता
यही दीवार बाक़ी थी सलामत छोड़ दी हम ने
गुनहगारों में शामिल मुद्द'ई भी और मुल्ज़िम भी
तिरा इंसाफ़ देखा और 'अदालत छोड़ दी हम ने
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अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है
इक नज़र मेरी तरफ़ भी तिरा जाता क्या है
इक नज़र मेरी तरफ़ भी तिरा जाता क्या है
मेरी रुस्वाई में वो भी हैं बराबर के शरीक
मेरे क़िस्से मिरे यारों को सुनाता क्या है
पास रह कर भी न पहचान सका तू मुझ को
दूर से देख के अब हाथ हिलाता क्या है
ज़ेहन के पर्दों पे मंज़िल के हयूले न बना
ग़ौर से देखता जा राह में आता क्या है
ज़ख़्म-ए-दिल जुर्म नहीं तोड़ भी दे मोहर-ए-सुकूत
जो तुझे जानते हैं उन से छुपाता क्या है
सफ़र-ए-शौक़ में क्यूँ काँपते हैं पाँव तिरे
आँख रखता है तो फिर आँख चुराता क्या है
उम्र भर अपने गरेबाँ से उलझने वाले
तू मुझे मेरे ही साए से डराता क्या है
चाँदनी देख के चेहरे को छुपाने वाले
धूप में बैठ के अब बाल सुखाता क्या है
मर गए प्यास के मारे तो उठा अब्र-ए-करम
बुझ गई बज़्म तो अब शम्अ' जलाता क्या है
मैं तिरा कुछ भी नहीं हूँ मगर इतना तो बता
देख कर मुझ को तिरे ज़ेहन में आता क्या है
तेरा एहसास ज़रा सा तिरी हस्ती पायाब
तो समुंदर की तरह शोर मचाता क्या है
तुझ में कस-बल है तो दुनिया को बहा कर ले जा
चाय की प्याली में तूफ़ान उठाता क्या है
तेरी आवाज़ का जादू न चलेगा उन पर
जागने वालों को 'शहज़ाद' जगाता क्या है
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"क्रिसमस का दरख़्त"
मैं भी हूँ गोया क्रिसमस का दरख़्त
मेरा रिश्ता भी ज़मीं से आसमाँ से और हवा से कट चुका
बाग़ छूटा खेतियाँ छूटीं
मैं घर के मरकज़ी कमरे में आ कर डट चुका
मेरे बच्चों ने सजाया है मुझे
रौशनी के नन्हे नन्हे बल्ब टाँके हैं मिरी बाँहों के साथ
मेरी शाख़ों में हैं तोहफ़े
मुख़्तलिफ़ रंगों के काग़ज़ और सुनहरे टेप में लिपटे हुए
है रक़म हर एक तोहफ़े पर कोई मानूस नाम
रात होगी और डिनर के बा'द मेरे पास सब आ जाएँगे
मेरी बीवी मेरे बच्चे मेरे दोस्त
मेरी शाख़ों से उतारे जाएँगे तोहफ़े तमाम
जागती सोई हुई गुड़िया
दमकती धारियों वाला फ़्राक
मेरे बेटे के लिए बंदूक़
जिस से वो करेगा उड़ती चिड़ियों का शिकार
मेरी बीवी के लिए नेकलेस चमकता पुर-वक़ार
और भी तोहफ़े बहुत से बे-शुमार
और बच्चों के लिए और अपने प्यारों के लिए
जब गुज़र जाएगी शब
बट चुकेंगे सारे तोहफ़े बुझ चुकेंगे बल्ब सब
मैं ड्राइंग-रूम की बे-कार शय हो जाऊँगा
मेरे सूखे ज़र्द-पत्तों की महक
जागती-जीती फ़ज़ा में कब तलक
फिर मिरी बीवी कहेगी
आओ बच्चो घर की ज़ेबाइश नए सिरे से करें
फेंक दें अब घर से बाहर ये क्रिसमस का दरख़्त
पत्ता पत्ता उस की हर इक शाख़ का मुरझा गया
अब नया साल आ गया
Read Fullमेरा रिश्ता भी ज़मीं से आसमाँ से और हवा से कट चुका
बाग़ छूटा खेतियाँ छूटीं
मैं घर के मरकज़ी कमरे में आ कर डट चुका
मेरे बच्चों ने सजाया है मुझे
रौशनी के नन्हे नन्हे बल्ब टाँके हैं मिरी बाँहों के साथ
मेरी शाख़ों में हैं तोहफ़े
मुख़्तलिफ़ रंगों के काग़ज़ और सुनहरे टेप में लिपटे हुए
है रक़म हर एक तोहफ़े पर कोई मानूस नाम
रात होगी और डिनर के बा'द मेरे पास सब आ जाएँगे
मेरी बीवी मेरे बच्चे मेरे दोस्त
मेरी शाख़ों से उतारे जाएँगे तोहफ़े तमाम
जागती सोई हुई गुड़िया
दमकती धारियों वाला फ़्राक
मेरे बेटे के लिए बंदूक़
जिस से वो करेगा उड़ती चिड़ियों का शिकार
मेरी बीवी के लिए नेकलेस चमकता पुर-वक़ार
और भी तोहफ़े बहुत से बे-शुमार
और बच्चों के लिए और अपने प्यारों के लिए
जब गुज़र जाएगी शब
बट चुकेंगे सारे तोहफ़े बुझ चुकेंगे बल्ब सब
मैं ड्राइंग-रूम की बे-कार शय हो जाऊँगा
मेरे सूखे ज़र्द-पत्तों की महक
जागती-जीती फ़ज़ा में कब तलक
फिर मिरी बीवी कहेगी
आओ बच्चो घर की ज़ेबाइश नए सिरे से करें
फेंक दें अब घर से बाहर ये क्रिसमस का दरख़्त
पत्ता पत्ता उस की हर इक शाख़ का मुरझा गया
अब नया साल आ गया
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अब मिरा दर्द मिरी जान हुआ जाता है
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
ऐ मिरे चारागरो अब मुझे अच्छा न करो
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चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया
वो ग़ैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया
वो ग़ैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया
हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी ग़ाएब
ये किस ख़राबे में दुनिया ने ला के छोड़ दिया
मैं अपनी जाँ में उसे जज़्ब किस तरह करता
उसे गले से लगाया लगा के छोड़ दिया
मैं जा चुका हूँ मिरे वास्ते उदास न हो
मैं वो हूँ तू ने जिसे मुस्कुरा के छोड़ दिया
किसी ने ये न बताया कि फ़ासला क्या है
हर एक ने मुझे रस्ता दिखा के छोड़ दिया
हमारे दिल में है क्या झाँक कर न देख सके
ख़ुद अपनी ज़ात से पर्दा उठा के छोड़ दिया
वो तेरा रोग भी है और तिरा इलाज भी है
उसी को ढूँड जिसे तंग आ के छोड़ दिया
वो अंजुमन में मिला भी तो उस ने बात न की
कभी कभी कोई जुमला छुपा के छोड़ दिया
रखूँ किसी से तवक़्क़ो तो क्या रखूँ 'शहज़ाद'
ख़ुदा ने भी तो ज़मीं पर गिरा के छोड़ दिया
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