पॉँव चादर में सिमट सकते नहीं
शौक़ भी तो अपने घट सकते नहीं
रास्तों में कुछ गिराने पड़ गए
जेब में सब ख़्वाब अट सकते नहीं
हम मुसाफ़िर हैं तेरी आवाज़ पे
रुक तो सकते हैं पलट सकते नहीं
— Yamir Ahsan
शौक़ भी तो अपने घट सकते नहीं
रास्तों में कुछ गिराने पड़ गए
जेब में सब ख़्वाब अट सकते नहीं
हम मुसाफ़िर हैं तेरी आवाज़ पे
रुक तो सकते हैं पलट सकते नहीं
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