मुहब्बत में मत पूछ क्या चाहता हूँ
वफ़ाई के बदले वफ़ा चाहता हूँ
हाँ शादी की ख़्वाहिश है मेरी ये तुम सेे
कहाँ कुछ दिनों का मज़ा चाहता हूँ
पता है वो दिल अपना बहला रही है
मगर मैं वही बेवफ़ा चाहता हूँ
गला ही दबा दे कोई यार मेरा
मरज़ की यही बस शिफ़ा चाहता हूँ
कहीं पेड़ को चींटियाँ ही न खा लें
वो तूफ़ाँ में टूटे ख़ुदा चाहता हूँ
मेरी मौत पे तेरे मोती से आँसू
ज़ियादा नहीं बस ज़रा चाहता हूँ
तू अगले जनम में हाँ पहले ही मिलना
किसी रोज़ होना तेरा चाहता हूँ
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