तुम से मुझको सच्चा प्यार नहीं होता
मुझ से ग़ज़लों का व्यापार नहीं होता
मैं अपनी मस्ती में डूबा होता, गर
मेरी नैया का मझधार नहीं होता
नफ़रत वालों की है ये दुनियादारी
उल्फ़त वालों का संसार नहीं होता
बाकी सब कुछ पैसों से मिल जाता है
क़िस्मत का कोई बाज़ार नहीं होता
तुम को सच्चे दोस्त कहाँ मिल जाते हैं
मेरा कोई झूठा यार नहीं होता
जिनके पास जु़बाँ का ख़ंजर होता है
उनके हाथों में हथियार नहीं होता
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Aditya
our suggestion based on Aditya
As you were reading Dushman Shayari Shayari