Aditya
Aditya
Ghazal

तुम से मुझ को सच्चा प्यार नहीं होता

मुझ से ग़ज़लों का व्यापार नहीं होता

मैं अपनी मस्ती में डूबा होता, गर
मेरी नैया का मँझधार नहीं होता

नफ़रत वालों की है ये दुनियादारी
उल्फ़त वालों का संसार नहीं होता

बाकी सब कुछ पैसों से मिल जाता है
क़िस्मत का कोई बाज़ार नहीं होता

तुम को सच्चे दोस्त कहाँ मिल जाते हैं
मेरा कोई झूठा यार नहीं होता

जिन के पास ज़बाँ का ख़ंजर होता है
उन के हाथों में हथियार नहीं होता

— Aditya

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