कुछ कम अपनी ख़्वारी कर

थोड़ी ख़ुद से यारी कर

माना हयात ख़ंजर है
हिम्मत को दो धारी कर

बोल न मीठा कड़वों से
बातें उन से खारी कर

सुख दुख आता जाता है
सूरत हँसती प्यारी कर

ख़ारिज का ग़म मत कर तू
सुधार करना जारी कर

दिल बच्चा ख़ुश रहने दे
हसरत पूरी सारी कर

हल्की फुल्की ग़ज़लें कह
आभा मन मत भारी कर

— Abha sethi

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