Manish
Manish
Ghazal

मोहब्बत में हम को ख़सारा हुआ है

मगर फ़ाइदा दिल को सारा हुआ है

मेरे हौसले को न छाले दिखे हैं
कठिन मंज़िलों ने पुकारा हुआ है

जिसे सोच कर रो पड़े ज़िन्दगी भी
समय हम ने ऐसा गुज़ारा हुआ है

मुझे ज़िंदगी से शिकायत नहीं है
कि जब से मेरा दिल तुम्हारा हुआ है

ग़ज़ल सब मेरी हाँ मुकम्मल हुई हैं
तेरी ओर से जब इशारा हुआ है

तेरे दिल में है दुसरा कौन पूछा
मेरा तब से उन से किनारा हुआ है

— Manish

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