मुँह-ज़बानी
चाँद की इस रौशनी में
तेरा चेहरा झिलमिलाए
खिलखिला उठती हैं रातें
जब कभी तू मुस्कुराए
तेरी ज़ुल्फ़ों की घटा है
जो मिरे दिल को छू जाए
तेरी आँखों का समुंदर
उस की गहराई बुलाए
दिल की धड़कन गाती है बस
तेरे ही मुँह का तराना
तू जहाँ है इश्क़ है सब
और तेरा ही फ़साना
मैं तू बन जाएँ फ़क़त तक
प्यार की ऐसी निशानी
तेरी मेरी ये कहानी
गुन गुनाए हर फ़रिश्ता
मुँह-ज़बानी मुँह-ज़बानी
— Adarsh Anand Amola















