“तुम नइँ समझे”

मुश्किल को आसान बनाया जा सकता था
जा सकता था
दुनिया छोड़ के भी तो जाया जा सकता था
पागल हो क्या
ख़ुद से इतनी नफरत क्यूँ करते हो प्यार
ख़ुद से नफरत
क्या जुमला है
जुमलेबाज़ी पर जीना आसान नहीं पर
अच्छा तो अब ठान चुके हो
पागलपन में ही जीना है
पागल होना मेरे बस की बात नहीं है
ख़ुद में खोना मेरे बस की बात नहीं है
कुछ तो अच्छा बोला तुम ने
शुक्र है मौला
नइँ
तुम नइँ समझे
अच्छा होना मेरे बस की बात नहीं है

— Aqib khan

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