जो भी चाहो करा सकते हो
जिस को चाहो हरा सकते हो
मैं तो हाकिम हूँ इस शहर का
मुझ को किस से डरा सकते हो
कोई भी तो नहीं है यहाँ
तुम क़रीब आ ज़रा सकते हो
दिल में कुछ है अभी ख़ाली सा
क्या इसे तुम भरा सकते हो
है ज़रूरत को तुम से नजात
काम कोई करा सकते हो
तुम को हासिल जो ये हुस्न है
बहस कोई हरा सकते हो
इस फ़लक पर हम आ तो गए
डर है कुछ भी करा सकते हो
— Amaan Ali















