बरसों से जो सँभाल के रक्खा था एक ख़्वाबमलबे के नीचे दब गया जब आया ज़लज़लावो बीच ज़लज़ले के उसे ढूँढ़ने में गुमबेटा नहीं रहा ये बा'द में पता चला— Amaan Pathan