मुँह पे सच कहने में डर जाना तुम्हारा
इस से तो अच्छा है मर जाना तुम्हारा
लग रहा है मुझ को कुछ षड्यंत्र जैसा
यूँ अचानक से सुधर जाना तुम्हारा
तुम से मेरा रब्त है ग़ैरों सा लेकिन
दर्द देता है बिखर जाना तुम्हारा
जाने कितनी ज़िंदगी ले बैठा अब तक
इश्क़ करना और मुकर जाना तुम्हारा
ठीक है फिर तुम भी जाओ ख़ैरियत से
है ज़रूरी इतना गर जाना तुम्हारा
— Amit Rajvanshi 'Guru'















