ख़ुशहाल ज़िंदगी की अधूरी तलाश मेंमैं ने बना लिया है ठिकाना ही लाश मेंवो देखता है मुझ को मुहब्बत में इस तरहजोकर को देखते हैं जैसे लोग ताश में— Amit Tyagi