दर्द-ए-दिल की दवा कीजिए
गर न हो तो दुआ कीजिए
'इश्क़ गर हो तो क्या कीजिए
या ख़ुदा या ख़ुदा कीजिए
'इश्क़ की इंतिहा कीजिए
अश्क आब-ए-बक़ा कीजिए
हाँ नहीं ये अगर वो मगर
साफ़ मुँह पर मना कीजिए
आपने की थी हम सेे वफ़ा
थोड़ा ख़ौफ़-ए-ख़ुदा कीजिए
अब तबीअत ज़रा ठीक है
ज़ख़्म कोई अता कीजिए
वस्ल की बात पर ये कहा
अपनी हद में रहा कीजिए
मैं हूँ फ़ुर्क़त का मारा हुआ
मेरे मुँह मत लगा कीजिए
यार दुनिया ये अच्छी नहीं
मेरे दिल में रहा कीजिए
आप बेशर्म ठहरे मगर
झूठी मूठी हया कीजिए
जीते जी ख़ुल्द मिल जाएगा
शेख़ साहब पिया कीजिए
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