कि हारा नहीं है ये जो रो रहा है कि ख़्वाबों से झगड़ा अभी हो रहा हैहक़ीक़त से वाक़िफ़ ज़माना बहुत हैये लड़का ग़रीबी से सब खो रहा है— Bhoomi Srivastava