चाहे जितनी मर्ज़ी हो मेरा ख़याल कीजिए
आप को नहीं है हक़ कोई सवाल कीजिए
मेरे शहर बस ये मुफ़्लिसी है और कुछ नहीं
जाइए कहीं बड़ी जगह कमाल कीजिए
सब्र है बहुत मगर भरोसा आप पर नहीं
इंतिज़ार या'नी जीना भी मुहाल कीजिए
हिज्र की ये शाम है ज़रा क़रीब आइए
आख़िरी दफा़ तो आगे अपना गाल कीजिए
इश्क़ आप के तो बस की बात ही नहीं 'दिवू'
मुझ को चाहने से अच्छा है मलाल कीजिए
— Divu















