jab se tu bhi mere paas nahin hai dost | जब से तू भी मेरे पास नहीं है दोस्त

  - Gaurav Singh

जब से तू भी मेरे पास नहीं है दोस्त
ज़िन्दा होने का एहसास नहीं है दोस्त

जिसको अपने दिल का हाल सुनाऊँ मैं
कोई मेरा इतना ख़ास नहीं है दोस्त

दिल इकलौती ऐसी दुनिया है जिस
में
कोई राजा कोई दास नहीं है दोस्त

भूखा भटक रहा है राणा सदियों से
अब जंगल में कोई घास नहीं है दोस्त

लछमन सीता और कई लोगों का दुख
केवल राम का ही बनवास नहीं है दोस्त

थोड़ा-थोड़ा करके जाम बना साक़ी
बोतल भर की मेरी प्यास नहीं है दोस्त

छोड़ मेरा मुँह मत खुलवा अब जाने दे
तेरा नंबर किसके पास नहीं है दोस्त

  - Gaurav Singh

Ehsaas Shayari

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