मैं ने क्या क्या लिख छोड़ा है
अच्छा ख़ासा लिख छोड़ा है
नफ़रत पर मिट्टी डाली है
जो था प्यारा लिख छोड़ा है
मैं ने सागर मीठा लिख कर
दरिया खारा लिख छोड़ा है
आज़ादी का वा'दा कर के
ये बँटवारा लिख छोड़ा है
रौनक है वो हर महफ़िल की
हम को तन्हा लिख छोड़ा है
— Gopesh "Tanha"















