ये सब कैसे हो जाता है
लम्हा़ कैसे खो जाता है
प्यार की कोई उम्र नहीं है
मत पूछो बस हो जाता है
तुम को पाना पागल पन है
पागल पन तो हो जाता है
मैं तुझ
में जगता हूँ हर-पल
तू क्यूँ मुझ में खो जाता है
जिस को भी तुम छू लेती हो
वो तो सोना हो जाता है
— Subrat Tripathi















