मैं कुछ भी याद करता हूँ वो चेहरा याद आता है

मुझे क्यूँ आजकल इक शख़्स ज़्यादा याद आता है

मेरे तस्वीर का वा'दा कभी जो कर गई थी वो
फ़क़त अब उस मुसव्विर का वो वा'दा याद आता है

वही पायल, वही चूड़ी, वही कंगन, वही बाली
मुझे अब प्यार का हर एक तोहफ़ा याद आता है

मेरी इस ज़िंदगी में लाख क़िस्सों को जिया मैं ने
न जाने क्यूँ मुझे तेरा ही क़िस्सा याद आता है

वफ़ा की बात करते हो तो आओ बैठो महफ़िल में
चलो अब देखते हैं और क्या क्या याद आता है

— AYUSH SONI

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Mehman Shayari

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