ऊपर से दिखती है जितनी प्यारी दुनियाअंदर उतनी हिर्स-ओ-हवस की मारी दुनियादुनिया से ऊपर उठकर दुनिया देखूँ तोहैरत होती है कितनी बेचारी दुनिया— Jagveer Singh