abhii khaamosh hai gussa hamaara | अभी ख़ामोश है ग़ुस्सा हमारा

  - Meem Alif Shaz

अभी ख़ामोश है ग़ुस्सा हमारा
अभी देखा नहीं जज़्बा हमारा

कभी टूटी हुई तलवार समझो
अभी आया नहीं मौक़ा हमारा

सिफ़ारिश चल रही है ज़िन्दगी से
न जाने कब खुले रस्ता हमारा

बुलाने की कभी कोशिश तो करते
पिघल जाता तभी शीशा हमारा

मोहब्बत से नहीं कोई लड़ाई
मगर नफ़रत से है झगड़ा हमारा

नहीं खाई कभी रिश्वत किसी की
तभी तो रंग है फीका हमारा

उदासी फेंक दी कमरे से बाहर
कहीं हो जाए फिर चर्चा हमारा

निकलते जा रहे साँसों के धागे
बहुत ही कम बचा जीना हमारा

मोहब्बत करना सीखेंगे मेरे शाज़
यहाँ चलता नहीं सिक्का हमारा

  - Meem Alif Shaz

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