'इश्क़ उस को तू बेहिसाब न कर
ज़िन्दगी अपनी तू 'अज़ाब न कर
याद कर उस को बार बार मगर
उस की आदत कभी ख़राब न कर
उस की आदत है दिल दुखाना अगर
ख़ुद को तू इतना इज़्तिराब न कर
हिज्र भी 'इश्क़ का ही हिस्सा है 'शाज़'
रात भर प्याले में शराब न कर
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Meem Alif Shaz
our suggestion based on Meem Alif Shaz
As you were reading Ulfat Shayari Shayari