shor men hoton pe khaamoshi l | शोर में होटों पे ख़ामोशी लाना बेहतर

  - Meem Alif Shaz

शोर में होटों पे ख़ामोशी लाना बेहतर
लफ़्ज़ों को ज़ाया' करने से बचाना बेहतर

दिन ढलते ही जब ज़ोजा ख़ुश हो जाती है
रात के आने से पहले घर जाना बेहतर

वह आते ही होंगे हम यह कब तक सोचे
ख़ुद ही जा के उन को घर से बुलाना बेहतर

रिश्तों में तो दरारें अक्सर आ जाती हैं
फौरन उन में मोहब्बत ही भरवाना बेहतर

गहरे कोहरे में सूरज कैसे निकलेगा
इतनी मायूसी से बाहर आना बेहतर

सड़कों पे चलते रहने से कुछ भी न होगा
अपनी आँखों में इक ख़्वाब सजाना बेहतर

माँ की दुआएँ तो सच्चे मोती हैं 'अरशद'
उन के पैर को अपने आप दबाना बेहतर

  - Meem Alif Shaz

Masti Shayari

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